हजारीबाग में विनय चौबे के कार्यकाल में ‘देवता’ जमीन की भी अवैध तरीके से खरीद-बिक्री कर दी..
राँची।झारखण्ड के हजारीबाग में सेवायत ट्रस्ट भूमि घोटाले में एसीबी ने अपने दस्तावेज में बताया है कि हजारीबाग के तत्कालीन डीसी विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में देवता की जमीन की भी अवैध तरीके से खरीद-बिक्री कर दी गई। घोटाले में आरोपी जमीन माफिया सुधीर कुमार सिंह व विजय प्रताप सिंह से जुड़े मामले में दायर हलफनामे में एसीबी ने कोर्ट को बताया है कि कैसे रसूखदारों और अफसरों की मिलीभगत से देवता की जमीन की हेराफेरी की गई।
एसीबी ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 1941 में गणपत राय सरोजी ने 2.75 एकड़ जमीन श्री श्री महावीर जी (देवता) को समर्पित की थी।डीड की शर्तों के अनुसार, इस जमीन को कभी भी बेचा, हस्तांतरित या गिरवी नहीं रखा जा सकता था। हालांकि, बाद में सेवायतों ने इसे निजी संपत्ति बताकर बेचने की कोशिश की, जिसे प्रशासन और पूर्व में उच्च न्यायालय ने 2005 में भी अवैध करार दिया था।
केस की जांच के दौरान एसीबी ने मनीष नारायण, प्रीति प्रसाद और नंद रानी सिन्हा की गवाही दी, जिनके बयानों से यह साफ हुआ है कि आरोपी सुधीर कुमार सिंह और विजय प्रताप सिंह पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर बनकर खरीदारों को फांसते थे। वे खरीदारों को झांसा देते थे कि तत्कालीन हजारीबाग उपायुक्त विनय चौबे से उनके गहरे संबंध हैं और वे जमीन का म्यूटेशन आसानी से करा देंगे।
गवाहों ने बताया है कि आरोपी अक्सर उपायुक्त कार्यालय में देखे जाते थे। 3.16 करोड़ का संदिग्ध मनी ट्रेल और फर्जीवाड़ा एसीबी ने जांच में वित्तीय अनियमितताओं का पुनः जिक्र अपने हलफनामे में किया है। बताया है कि वर्ष 2010 से 2015 के बीच ब्रह्मास्त्र एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड के खाते में 3.16 करोड़ रुपये संचिता व साले शिपिज त्रिवेदी की है।
केस में एक पीड़ित कोर्रा निवासी अरविंद कुमार अग्रवाल ने बताया कि आरोपियों ने उनसे सेवायत जमीन के बदले 25 लाख रुपये लिए, लेकिन न तो जमीन दी और न ही पैसे लौटाए। हलफनामे में बताया गया है कि मामले के अन्य आरोपी (सेवायत) न केवल जांच में असहयोग कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने अदालत में फर्जी पते पर जमानत याचिकाएं दाखिल कर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है।
एसीबी ने आशंका जताई है कि हजारीबाग जिले में केवल यही एक जमीन नहीं, बल्कि लगभग 5000 एकड़ सरकारी, वन, गैर-मजरुआ आम और खास महल भूमि का अवैध हस्तांतरण किया गया है। यह पूरा खेल तत्कालीन उपायुक्त विनय कुमार चौबे के कार्यकाल के दौरान रचा गया साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।

