निलंबित IAS अधिकारी और राँची के पूर्व डीसी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, अदालत ने एक शर्त पर दी जमानत

 

राँची।सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को झारखण्ड कैडर के निलंबित IAS अधिकारी और राँची के पूर्व उपायुक्त छवि रंजन को बड़ी राहत देते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में उन्हें जमानत दे दी। हालांकि अदालत ने एक शर्त लगाते हुए कोर्ट की इजाजत के बिना उनके झारखण्ड से बाहर जाने पर रोक लगाई है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रंजन के 30 महीने जेल में बिताने और इसके बावजूद ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं कर पाने को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें अनिश्चितकाल के लिए जेल में नहीं रख सकते।

सुनवाई के दौरान पीठ ने ईडी का पक्ष रख रहे वकील ज़ोहेब हुसैन से कहा, ‘हम समझते हैं कि आरोप बहुत गंभीर हैं, लेकिन ईडी को इन आरोपों को साबित करना होगा। क्योंकि उन्हें अनिश्चित काल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।’ इसके बाद अदालत ने इस शर्त के साथ छवि रंजन को जमानत दे दी, कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना झारखण्ड नहीं छोड़ेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा ‘याचिकाकर्ता द्वारा हिरासत में बिताई गई अवधि को ध्यान में रखते हुए और उस पर लगाए गए आरोपों की प्रकृति पर कोई राय व्यक्त किए बिना, हम याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने के इच्छुक हैं और इसी वजह से याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने का निर्देश देते हैं, बशर्ते कि वह निचली अदालत की संतुष्टि के लिए जमानत बांड प्रस्तुत करे।’ इसके साथ ही अदालत ने छवि रंजन को यह निर्देश भी दिया कि वह प्रत्येक सुनवाई पर निचली अदालत में उपस्थित रहेंगे और लंबित कार्यवाही को समय पर निपटाने के लिए अपनी ओर से पूरा सहयोग देंगे।

अदालत ने कहा कि रंजन 2022 में दर्ज ईडी मामले के आरोपियों में से एक हैं। इस केस के मुख्य आरोपी का नाम अमित कुमार अग्रवाल है। अग्रवाल व अन्य के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने 1 अक्टूबर, 2021 की एक सेल डीड (बिक्री विलेख) के रिकॉर्ड में धोखाधड़ी की, जो जयंत कर्नाड नामक व्यक्ति के स्वामित्व वाली एक संपत्ति से संबंधित था।

पीठ ने कहा, ‘याचिकाकर्ता छवि रंजन उस समय डिप्टी कमिश्नर यानी उपायुक्त थे और उन पर ऋण सुविधाओं आदि का फायदा उठाने के उद्देश्य से भूमि जोत के रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की साजिश रचने और मुख्य आरोपी की सहायता करने का आरोप है। याचिकाकर्ता अखिल भारतीय सेवा का सदस्य है। उन्हें 4 मई, 2023 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं।’

पीठ ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद शिकायत दर्ज की गई थी, मुकदमा शुरू हो गया है और अब तक 31 गवाहों में से पांच से पूछताछ हो चुकी है। अदालत ने कहा, ‘मुकदमे के खत्म होने में कुछ समय लगेगा। कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं, ऐसे में याचिकाकर्ता को जमानत देने में कोई दिक्कत नहीं है, जबकि उनका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है।’

अदालत ने कहा कि जिन गवाहों ने अभी तक गवाही नहीं दी है, उनकी पृष्ठभूमि को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है। हालांकि अदालत ने फिर भी कहा कि ‘अगर फिर भी किसी भी स्थिति में यदि याचिकाकर्ता द्वारा ऐसी कोई कोशिश की जाती है, तो यह जमानत के दुरुपयोग के समान होगा और इसके लिए उन्हें आवश्यक परिणाम भुगतने होंगे।’

छवि रंजन, जो कि झारखण्ड कैडर के 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं, ईडी ने उन्हें 4 मई, 2023 को उस वक्त हिरासत में लिया था, जब वह 10 घंटे की पूछताछ के बाद अपने कार्यालय पहुंचे थे। उस समय वह राज्य के समाज कल्याण विभाग के निदेशक थे।

बता दें कि केंद्रीय एजेंसी एक दर्जन से ज्यादा जमीन सौदों की जांच कर रही है, जिनमें से एक सौदा रक्षा भूमि से संबंधित है, जिसे नौकरशाहों और भू-माफियाओं के गठजोड़ ने 1932 से ही कथित जाली बिक्री पत्रों और अन्य दस्तावेजों के ज़रिए हड़प लिया था।

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