खूंटी में मजदूरों को नगद भुगतान में थमा दिए मनोरंजन बैंक के नोट…! ग्राम प्रधान ने वन विभाग के गार्ड पर लगाया आरोप,रेंजर ने कहा-आरोप गलत,जांच जारी
खूंटी।झारखण्ड के खूंटी जिले के तोरपा प्रखंड क्षेत्र के ऐरमेरे के ग्राम प्रधान बर्नार्ड आइंद ने वन विभाग के गार्ड राहुल महतो पर नकली नोट (बच्चों के खेलने वाले मनोरंजन बैंक वाले नोट) देने का आरोप लगाया है।ग्राम प्रधान का कहना है कि उन्हें यह नोट मजदूरों का भुगतान करने के लिए वन विभाग के गार्ड के द्वारा रविवार को दिए गए थे।ग्राम प्रधान बर्नार्ड आइंद ने बताया कि रविवार शाम वन विभाग के गार्ड राहुल ने उन्हें फोन कर दो कटहल मांगे थे। इस पर वह कटहल देने के लिए तैयार थे। ग्राम प्रधान के अनुसार कटहल लेने गार्ड राहुल महतो स्वयं ऐरमेरे गांव आया था।कटहल लेने के बाद राहुल ने उन्हें 200 रुपये के नोटों की एक गड्डी दी। जिसे ग्राम प्रधान ने रख लिया।ग्राम प्रधान के अनुसार 200 रुपये की गड्डी में से उन्होंने कुछ रुपये निकाल कर वन विभाग के गड्ढे खोदने वाले मजदूरों को भुगतान कर दिया था। लेकिन मंगलवार सुबह कई मजदूर ग्राम प्रधान के घर पहुंचे और नकली नोट देने की शिकायत की। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ।इसके बाद ग्राम प्रधान खुद को ठगा महसूस कर रहे है। उन्होंने मामले में वन विभाग के गार्ड राहुल महतो पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम प्रधान और मजदूरों से मिली जानकारी के मुताबिक तोरपा थाना क्षेत्र के एरमेरे गांव में वन विभाग द्वारा पौधरोपण कराया जा रहा है।जिसके तहत मजदूरों को भुगतान किया जाना था।ग्राम प्रधान बर्नार्ड आइंद ने वनरक्षी राहुल कुमार महतो पर आरोप लगाया है कि रविवार देर शाम उन्हें मनोरंजन बैंक के नोटों का एक बंडल दिया गया और कहा गया कि इससे मजदूरों को भुगतान कर दिया जाए।
इधर, इस संबंध में वन प्रमंडल के रेंजर सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें इस मामले को सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान गलत आरोप लगाकर वन कर्मियों को बदनाम करने का कोशिश कर रहे है।उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम बनाई गई है। जांच में दोषी पाए जाने पर कर्मियों पर कार्रवाई होगी।फिलहाल मामला संदेहास्पद लग रहा है।एरमेरे गांव के कुछ लोग विभाग को बदनाम करने के लिए यह मनगढ़ंत कहानी रच रहे हैं।
अब सवाल यह है कि मजदूरों को कैश में कैसे पेमेंट किया गया। जबकि नियमतः डीबीटी के माध्यम से मजदूरों को भुगतान किया जाना है।बरहाल, मामले की जांच की जरूरत है,ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

