गैंगस्टर मयंक सिंह ने कराया था एटीएस डीएसपी पर हमला, अमन साहू गैंग का था मास्टरमाइंड…चार्जशीट में हुआ खुलासा..

 

राँची।झारखण्ड एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्ता) ने मृत गैंगस्टर अमन साहू के गिरोह के कुख्यात सदस्य और रणनीतिकार सुनील कुमार उर्फ सुनील कुमार मीणा उर्फ मयंक सिंह के खिलाफ पूरक आरोप पत्र (चार्जशीट संख्या-10/2025) दाखिल कर दिया है। एटीएस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेज से मयंक सिंह की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और कानून को चुनौती देने के दुस्साहस का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।जांच में इंस्टाग्राम डाटा के जरिए विदेशों से गैंग चलाने और एटीएस के डीएसपी पर फायरिंग से जुड़े केस में महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। अजरबैजान से प्रत्यर्पण के बाद पहली बार मयंक सिंह के खिलाफ एटीएस ने चार्जशीट दायर की है।

डीएसपी को गोली मारने की खबर शेयर कर लिखा- हमारा कद पुलिस से ऊंचा

चार्जशीट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा मयंक सिंह का सोशल मीडिया पोस्ट है। पतरातू में एटीएस की छापेमारी के दौरान जब पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी हुई, तो मयंक सिंह ने इसे अपने गिरोह की हिम्मत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया। उसने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट एसके मीणा घरसाणा 007 पर एटीएस के डीएसपी और दारोगा को गोली लगने वाली अखबार की कटिंग का वीडियो बना अपलोड किया। उसने खबर पर टिक मार्क लगाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनके गिरोह का कद पुलिस से भी ऊंचा हो गया है। इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए उसने गिरोह के सदस्यों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया।

मयंक सिंह मलेशिया-थाईलैंड से करता था गैंग की मॉनिटरिंग

जांच में यह पुष्टि हुई है कि राजस्थान के श्रीगंगानगर (वर्तमान अनूपगढ़) का मूल निवासी सुनील मीणा उर्फ मयंक सिंह अपराध को अंजाम देने के लिए विदेश में पनाह लिए हुए था। तकनीकी साक्ष्यों और पासपोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, वह मलेशिया, थाईलैंड और अजरबैजान (बाकू) में रहकर गैंग ऑपरेट कर रहा था। चार्जशीट के मुताबिक, मयंक सिंह 9 अगस्त 2019 को मलेशिया गया था और वहां वेयर हाउस वर्कर के रूप में अस्थायी वीजा पर शाह आलम शहर में रह रहा था। 20 नवंबर 2023 को थाइलैंड के फुकेट पहुंचा। इसके 11 महीने बाद 24 सितंबर 2024 को वह थाइलैंड से अजरबैजान पहुंचा था, जहां भारतीय एजेंसियों के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। तकनीकी जांच में उसके इंस्टाग्राम अकाउंट के आईपी एड्रेस का मिलान उन देशों के लोकेशन से हुआ है, जहां वह उस वक्त मौजूद था।

अनुसंधान में सामने आए तथ्य, रंगदारी के लिए रची गई थी खूनी साजिश

अनुसंधान में यह बात सामने आई कि जुलाई 2023 माह में अमन साहू और मयंक सिंह के बीच बात हुई थी, जिसमें गिरोह के लिए रंगदारी वसूलने और भय कायम करने का निर्देश दिया गया था। इसी उद्देश्य से पतरातू क्षेत्र में एक मीटिंग रखी गई थी। मयंक सिंह और अमन साहू ने निर्देश दिया था कि अगर पुलिस मीटिंग में बाधा डालती है, तो जवाबी कार्रवाई (फायरिंग) की जाए। इसी आदेश का पालन करते हुए अपराधियों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें पुलिसकर्मी घायल हुए थे। सुनील कुमार मीणा उर्फ मयंक सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 307 (हत्या का प्रयास), 120बी (साजिश) और आर्म्स एक्ट के अलावा विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (यूएपीए) की धारा 16, 17 और 20 के तहत भी मामला सत्य पाया गया है। झारखण्ड सरकार के विधि विभाग ने उसके खिलाफ यूएपीए के तहत अभियोजन की स्वीकृति प्रदान कर दी है। एटीएस ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार अन्य अभियुक्तों, जैसे बॉबी साव और दिगंबर प्रजापति ने भी अपने स्वीकारोक्ति बयान में मयंक सिंह की संलिप्तता की पुष्टि की है।

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